सूचना प्रौद्योगिकी एवं वर्तमान परिवेश

 

कुबेर सिंह गुरूपंच1, नागेश्वर प्रसाद साहू2

1प्राचार्य, एम. जे. महाविद्यालय, भिलाई (छ.ग.)

2छात्रशिक्षक (बी.एड.), एम. जे. महाविद्यालय, भिलाई (छ.ग.)

 

प्रस्तावना

एक शिक्षक के रूप में हमें हमेशा अपडेट रहना चाहिए कि कौन सी घटना कब घट रही है, या क्यों घट रही है ? या यूँ कहें ये कि क्या ही शिक्षक को जन्म देता है, तो गलत नहीं होगा और इस क्या का उत्तर आज बहुत ही कम समय में जो खोज सकता है वह है सूचना प्रौद्योगिकी, अर्थात् सूचना प्रौद्योगिकी ने शिक्षा को एक नया आयाम दिया है, यह एक शिक्षक, विद्यार्थी, दोस्त, भाई-बहन जैसा रिश्ता हमारे साथ बना चुका है आज हम सुबह उठने के लिए मोबाईल में अलारम लगाते हैं। पूरे दिन का कार्यक्रम एक दिन पहले मोबाईल या लैपटाॅप या टैबलेट, जैसे सूचना संचार माध्यमों में अपडेट करके रखते हैं, ताकि कुछ छूट न जाए। कुछ स्वचालित यंत्रों को अपने जिम्मेदारी का काम देते हैं और शायद अपने बाद अपने एक आॅपशन के रूप में इन मशीनों का प्रयोग करते हैं। दिवार के पार या सात समंदर पार तक इसके द्वारा आसानी से झांक सकते हैं, ऐसा है सूचना व संचार प्राद्योगिकी।

 

सूचना प्रौद्योगिकी देश के विकास की सीढ़ी ही नहीं लिफ्ट है, देश को विकास की धारा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम, क्योंकि पलक झपकते हर पल की खबर इस माध्यम से प्राप्त हो जाती है आज कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जो इससे अछूता हो।

 

युवा देश के भविष्य हंै. भारत में अधिकांश आबादी युवाओं की है. हम इस जन-सांख्यिकीय अनुकूलता का लाभ तभी उठा सकते हैं जब हमारे सभी युवा शिक्षित, प्रशिक्षित तथा प्रेरित हों. भारत ने संचार एंव सूचना प्रौद्योगिकी तथा फार्मास्युटिकल अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है. वह विश्व के गिने-चुने देशों में शामिल है. इंजीनियंिरंग, चिकित्सा अनुसंधान एंव तकनीकी जैसे क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त कर अपनी प्रगति के साथ ही देश की तरक्की में भी हांथ बटा सकते हैं.

 

हमारी पौराणिक कहानियों में पात्रों के पास जो शक्तियां तपो बल से प्राप्त या चमत्कारों से प्राप्त होती थी, अब सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा महज कुछ शिक्षा से प्राप्त हो जाती है कम्प्यूटर तो मानो इन्टरनेट से जुड़कर महाभारत का संजय हो गया है जो हर रणभूमि की खबर सामने रख देता है। हम लोगों के फेस एक्सप्रेशन से उनके मन के भाव जान सकते हैं जिसे फेस रीडिंग, या फेस ऐनालिसिस कहते हैं। हम लोगों के चलने के ढंग से उनके मन के भाव बता सकते हैं जिसे गेट ऐनालिसिस कहा जाता है, ऐसे प्रयोग सूचना एवं संचार माध्यमों के बिना संभव न था। मैने ये शोध एक साल पहले प्रारंभ किया, गेट ऐनालिसिस पर शोध करने वाले मेरे एम.टेक. रूंगटा काॅलेज के मित्र जिबिन थॅामस के शोध पर हम चर्चा कर रहे थे। एक विचित्र लेकिन हर कार्य को सरल बनाने वाला विषय है सूचना प्रौद्योगिकी जिसका वर्तमान परिवेश में बहुत उपयोगिता है और इसका क्षेत्र बहुत ही व्यापक है।

 

अध्ययन क्षेत्र एवं उद्देश्य -

सूचना प्रौद्योगिकी का महत्व वर्तमान परिवेश में भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझने का एक प्रयास है.

 

सूचना प्रौद्योगिकी यद्यपि हर एक युग हर काल में थी, पर भारत में यह एक विस्तृत रूप में वर्तमान में ही उभर कर आया है . मेरे इस विषय पर अध्ययन का उद्देश्य है -

 

1    सूचना प्रौद्योगिकी का वर्तमान परिवेश में उपादेयता का पता लगाना।

2    सूचना प्रौद्योगिकी का भारत में उपयोग पता लगाना।

 

पुस्तकालय एवं प्रकाशन -

साइबरेरी में सूचना तथा सूचना प्रसार उपलब्ध कराने के लिए परपरागत सेवा सहित सूचना प्रौद्योगिकी उपलब्ध है। साइबरेंरी में स्नातकोत्तर शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वीडियो कान्फरेंसिंग सुविधा तथा टेलि कान्फरेंसिंग सुविधा उपलब्ध हैं। मैनेज पुस्तकालय संस्थान के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सूचना आवश्यकताओं की पूर्ति हेंतु सूचना समर्थन सेवाएं उपलब्ध कराता हैं। पुस्तकालय में मल्टि - यूजर क्षमता के साथ पूरी-पूरी इन्टरनेट कनेक्टिविटी है।

 

मैनेज कृषि विस्तार तथा तत्संबंधी विषयो पर कुछ साहित्य एवं अनेक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता हैं। मैनेज का एक्सटेंन्शन रीसर्च रिव्यू अर्ध वार्षिक प्रकाशन है तथा एक्सटेंन्शन डाइजेस्ट एक विषय आधारित प्रकाशन है।

 

सूचना प्रौद्योगिकी एवं चुनाव -

आगामी विधानसभा चुनावों में चुनाव विभाग तकनीक प्रौद्योगिकी की मदद से न केवल आसान और सुलभ चुनाव करवायेगा वरन ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को आॅनलाईन चुनावी जानकारी उपलब्ध करवाने का प्रयास करेगा।

 

राजस्थान के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक जैन ने सचिवालय में छप्ब् के सुचना विज्ञान अधिकारियों के मतदान दलों के गठन से संबंधित साफ्ट्वेयर प्रशिक्षण कार्यशाला में ये बात कही।

 

म्टड डंबीपदम .

इलेक्शन मैनेजमेंट साफ्ट्वेयर की मदद से पोलिंग काऊंटिंग पार्टी, सेक्टर आफिसर की ड्यूटी लगाने के साथ ही कर्मचारियों की ड्यूटी रेंड्माईजेशन करने के अलावा अन्य मह्रवपूर्ण आदेश निर्देश ऑनलाईन हो सकेंगे। इस बार कर्मचारियों का डाटाबेस प्स्डै से जोड दिया गया है, जिससे कर्मचारियों की तमाम जानकारी ऑनलाईन हो जायेगी। इससे जिला स्तरीय अधिकारियों को भी खासी सुविधा रहेगी। साथ ही चुनावों के समय होने वाले काम के दबाव मे भी राहत मिलेगी।

 

आमजन को मतदान के प्रति जागरुक करने के लिये मोबाईल सेवा भी शुरु कर दी है। इसके जरिये प्रत्येक मतदाता एक ैडै के द्वारा मतदान केन्द्र, भाग संख्या या अन्य जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस सुविधा को और भी लोकप्रिय बनाने के लिये मोबाईल कम्पनियों से कहा गया है कि वे इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार करें।

 

चुनाव आयोग शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कम्प्यूटराईज्ड सिस्टम शुरु करेगा, जिसमें एक वेबसाईट पर देश भर में कहीं भी, कोई भी अपने बारे में जानकारी ले सकेगा और अपनी अपडेट कर सकेगा। उन्होंन कहा कि इसके अलावा चुनाव के दिन ैडै मोनिटरिंग सिस्ट्म और मतगणना वाले दिन कॉऊंटिंग सेटअप भी लगाने की तैयारी में है, जिससे लोगों तक चुनाव संबंधी सूचना कुछ ही पलों में पहुंच सकेगी।

 

निष्कर्ष:-

भारत की वर्तमान तरक्की में आईटी का बहुत बड़ा योगदान है। पिछले पाँच सालों (2004-06) में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के बढ़ोतरी के प्रतिशत में 6 प्रतिशत योगदान आईटी का ही है। पिछले 10 सालों में देश में जो रोजगार उपलब्ध हुआ है, उसका 40 प्रतिशत आईटी ने उपलब्ध कराया है। भौगोलिक सीमाओं को तोड़ते हुए अलग-अलग देशों में उत्पाद इकाइयाँ बनाना, हर देश में उपलब्ध श्रेष्ठ संसाधन का उपयोग करना, विभिन्न देशों से काम करते हुए पूरे 24 घंटे अपने ग्राहक के लिए उपलब्ध रहना और ऐसे डेटा सेंटर बनाना जो कहीं से भी इस्तेमाल किए जा सकें, ये कुछ ऐसे प्रयोग थे जो हमारे लिए काफी कारगर साबित हुए। अब सारी दुनिया इन्हें अपना रही है। साधारण जनता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी सेवाओं के लिए कम लागत पर कुशलता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होनी जरूरी है। जिस प्रकार इसके घटक राज्यव्यापी एरिया नेटवर्क सामान्य सेवा केन्द्र, क्षमता निर्माण, इंटरनेट संवर्द्धन, रूट सरवरों की स्थापना, मीडिया लैब एशिया, सूचना सुरक्षा, अनुंसधान एवं विकास में जैसें खूब काम चल रहा है उसके लिए यह बहुत जरूरी है और यह इस बात का प्रमाण कहा जा सकता है कि आईटी के क्षेत्र में भारत ने जो प्रगति की है, उसका संबंध सीधे प्रतिभाओं के उच्च स्तरीय प्रयोग से है। भारत में आई. टी. एक उभरता हुआ भविष्य है जो स्वयं भविष्यवाणी भी कर सकता है, लेकिन आज भी हम सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में कई देशों से पीछे रह जाते हैं मेरा शोध इसके कारणों का पता लगाने के लिए है, मैं शोध का विद्यार्थी नहीं हूँ तो कुछ क्षेत्रों में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है पर मेरा प्रयास जारी है, जब तक मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता।

 

संदर्भरू

1ण्  डॉ. धीरेन्द्र पाठक, वर्तमान परिवेश में पत्रकारिता का लक्ष्य, डमकपं ां उंहपबए थ्तपकंलए छवअमउइमत 27ए 2009

2ण्  डॉ. ओम विकास, हिन्दी का वर्तमान और भविष्य की दृष्टि

1.       Pandeya Jitendra Kumar, Bharata-Svidana sambandha (1985-2010)

2.       Avbodh Kshamta for Samanya Adhyayan Paper II: - Page 4-6

3.       Civil Seva Prashna Patra Ii 60 Dino Mein - Page 10

ग्रंथ सूचीरू.

·        Bhan Uday, Sankhyiki Visleshan Graphs.

·        Singh, Samanya Vigyan.

·        Singh,Vigyan Evam Prodyogiki Ka Vikas.

·        http://hi.wikipedia.org/wiki/Hkkjr esa lwpuk ēkS|ksfxdh

 

Received on 15.03.2013

Revised on 05.04.2013

Accepted on 09.04.2013     

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Research J. Humanities and Social Sciences. 5(2): April-June, 2014, 225-227